गिलोय / गुडुची / अमृतवल्ली / अमृत समान औषधि HEALTH BENEFITS OF GILOY/ GUDUCHI / AMRRUTHVALLI : A DEVINE HERB

गिलोय / गुडुची / अमृतवल्ली / अमृत समान औषधि HEALTH BENEFITS OF GILOY/ GUDUCHI / AMRRUTHVALLI : A DEVINE HERB


गिलोय / गुडुची  / अमृतवल्ली / अमृत समान औषधि HEALTH BENEFITS OF GILOY/ GUDUCHI / AMRRUTHVALLI : A DEVINE HERB

 दोस्तों ,आपने गिलोय के बारे में अनेक बातें सुनी होंगी और गिलोय के कुछ फायदों के बारे में शायद जानते भी होंगे, लेकिन यह पक्का है कि आपको गिलोय के बारे में इतनी जानकारी नहीं होगी, जितनी हम आपको बताने जा रहे हैं।

आइये जानते हैं गिलोय क्या है ?गिलोय का परिचय

(What is Giloy ? Introduction of Giloy )

    गिलोय (Giloy) एक लोकप्रिय बेल है, जो जंगल-झाड़ियों में आसानी से उपलब्ध होती है।आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है ,जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। गिलोय (Giloy in hindi) कभी न सूखने वाली एक बड़ी अर्थात् एक बहुवर्षायु लता होती है ,अमृत के समान गुणकारी होने से इसका नाम अमृता है। आयुर्वेद में इसको अमृतवल्ली, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी, आदि नामों से जाना जाता है।  

गिलोय की पत्तियां दिखने में पान के पत्तों की तरह होती हैं और इसका रंग गाढ़ा हरा होता है।  इसका तना देखने में रस्सी जैसा लगता है। इसके कोमल तने तथा शाखाओं से जडें निकलती हैं। इस पर पीले व हरे रंग के फूलों के गुच्छे लगते हैं और फल मटर के दाने जैसे होते हैं।


  प्राचीन काल से इस आयुर्वेदिक औषधि का  इस्तेमाल किया जा रहा है। जब से डेंगू में गिलोय (Giloy in dengue) के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में लोगों को पता चला है, तब से लोग अपने घरों में भी गिलोय की बेल लगाना शुरू कर दिए हैं।  यह जिस वृक्ष पर चढ़ती है, उस वृक्ष के कुछ गुण भी इसके अन्दर आ जाते हैं। इसीलिए नीम के वृक्ष पर चढ़ी गिलोय सबसे अच्छी मानी जाती है।

आधुनिक आयुर्वेदाचार्यों (चिकित्साशास्त्रियों) के मतानुसार गिलोय नुकसानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों को भी खत्म करती है। टीबी रोग का कारण बनने वाले वाले जीवाणु की वृद्धि को रोकती है। आंत और यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को भी यह खत्म करती है।

गिलोय का लैटिन नाम टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया ( Tinospora cordifolia (Willd.) Miers, Syn-Menispermum cordifolium Willd.) है और यह मैनिस्पर्मेसी (Menispermaceae) कुल है।

गिलोय के संस्कृत नाम  वत्सादनी, छिन्नरुहा, गुडूची, तत्रिका, अमृता, मधुपर्णी, अमृतलता, छिन्ना, अमृतवल्ली, भिषक्प्रिया हैं।

गिलोय की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें मुख्यतया निम्न प्रजातियों का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है।
गिलोय (Tinosporacordifolia (Willd.) Miers)
Tinosporacrispa (L.)

Hook. f. & Thomson three Tinospora sinensis (Lour.)

Merr. (Syn- Tinospora malabarica (Lam.) Hook. f. & Thomson)


गिलोय कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Giloy Found or Grown?)


यह भारत में सभी स्थानों पर पायी जाती है। कुमाऊँ से आसाम तक, बिहार तथा कोंकण से कर्नाटक तक गिलोय मिलती है। यह समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊँचाई तक पाई जाती है।


गिलोय में मौजूद पोषक तत्व :

(Nutrients Present In Giloy)

  गिलोय एक हेल्दी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसमें कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गिलोय में गिलोइन नाम का ग्लूकोसाइड, पामेरिन, टीनोस्पोरिन, टीनोस्पोरिक एसिड मौजूद होता है। साथ ही इसमें आयरन, फॉस्फोरस, कॉपर, कैल्शियम, जिंक, मैगनीज भी अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। ये सभी शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं, जो कई रोगों से शरीर को बचाने का काम करते हैं।गुडूची या तिनोस्पोरा कॉर्डिफ़ोलिया का मुख्य प्रभाव एएमए (शरीर में दुर्भावना और पाचन के कारण बनने वाले विषाक्त पदार्थों) पर है। यह एएमए को कम करता है और सभी प्रकार के रोगों में मदद करता है जिसमें एएमए जुड़ा हुआ है। यह हर व्यक्ति के शरीर के प्रकार के साथ या किसी भी बीमारी के साथ इसके इम्युनोमोड्यूलेटर, कायाकल्प और एडाप्टोजेनिक कार्रवाई के कारण उपयुक्त है।

प्राथमिक तौर पर यह सूजनरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) , एंटासिड ,ज्वरनाशक , गाउट विरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीकोलिनेस्टरेज़ और एनाल्जेसिक ,कैंसर विरोधी, तनाव विरोधी, डिटॉक्सिफ़ायर, हेमेटोजेनिक (लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है) इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी (Immunomodulator), Rejuvenative, Adaptogen, , AMA-NASHAK, Antipruritics, इसका गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सुरक्षात्मक प्रभाव भी है।

गिलोय में पाए जाने वाले अन्य जैव-रासायनिक पदार्थ स्टेरॉयड, फ्लेवोनोइड, लिग्नेंट, कार्बोहाइड्रेट और अल्कलॉइड प्रचुर मात्रा में  होते हैं । इसकी उच्च पोषक तत्व सामग्री के कारण, गिलोय का उपयोग कई हर्बल, आयुर्वेदिक और आधुनिक दवाओं के निर्माण के लिए किया जाता है।इसमें एंटी-पाइरेक्टिक, एंटी-आर्थ्रिटिक, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर-रोधी गुण होते हैं।


गिलोय के 20 अद्भुत फायदे : अमरता की आयुर्वेदिक जड़
20 Amazing Benefits of Giloy : The Ayurvedic Root of Immortality

 

गिलोय का उपयोग कर वात-पित्त और कफ को ठीक किया जा सकता है। यह पचने में आसान होती है, भूख बढ़ाती है, साथ ही आंखों के लिए भी लाभकारी होती है। आप गिलोय के इस्तेमाल से प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ठ और पीलिया रोग में लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है और बुखार, उलटी, सूखी खाँसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग में भी प्रयोग की जाती है। महिलाओं की शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह बहुत अधिक लाभ पहुंचाती है। आइये देखते हैं अमरता की आयुर्वेदिक जड़- गिलोय के 20 अद्भुत फायदे:-

 1.आँखों के रोग में फायदेमंद (Benefits of Giloy to Cure Eye Disease in Hindi)

गिलोय के औषधीय गुण आँखों के रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। इसके लिए 10 मिली गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद सेंधा नमक मिलाकर खूब अच्छी प्रकार से पीस लें। इसे आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे अँधेरा छाना, चुभन, और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं।

गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनायें। 10-20 मिली काढ़ा में एक ग्राम पिप्पली चूर्ण शहद मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से आँखों की रौशनी बढ़ जाती है।

2. कान की बीमारी में फायदेमंद (Uses of Giloy in Eye Disorder in Hindi)


गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर लें। इसे कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान का मैल (कान की गंदगी) निकल जाता है। कान के बीमारी से राहत पाने के लिए सही तरह से इस्तेमाल करने पर गिलोय के फायदे मिल सकते हैं। गिलोय का औषधीय गुण बिना कोई नुकसान पहुँचाये कान से मैल निकालने में मदद करते हैं, इससे कानों को नुकसान भी होता है।


3. क्षय रोग में फायदेमंद (Giloy Uses in Terboculus Disease Treatment in Hindi)


गिलोय का औषधीय गुण क्षय रोग के समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करते हैं लेकिन इनको औषधि के रुप में बनाने के लिए इन सब चीजों के साथ मिलाकर काढ़ा बनाने की ज़रूरत होती है। अश्वगंधा, गिलोय, शतावर, दशमूल, बलामूल, अडूसा, पोहकरमूल तथा अतीस को बराबर भाग में लेकर इसका काढ़ा बनाएं। 20-30 मिली काढ़ा को सुबह और शाम सेवन करने से क्षय रोग की बीमारी ठीक होती है। इस दौरान दूध का सेवन करना चाहिए। इसका सही तरह से सेवन करने से  ही क्षय रोग पूरी तरह से लाभ उठा सकते हैं।

4. उल्टी में फायदेमंद (Benefits of Giloy to Stop Vomiting in Hindi)


एसिडिटी के कारण उल्टी हो तो 10 मिली गिलोय रस में 4-6 ग्राम मिश्री मिला लें। इसे सुबह और शाम पीने से उल्टी बंद हो जाती है। गिलोय के 125-250 मिली चटनी में 15 से 30 ग्राम शहद मिला लें।

इसे दिन में तीन बार सेवन करने से उल्टी की परेशानी ठीक हो जाती है। 20-30 मिली गुडूची के काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार के कारण होने वाली उलटी बंद होती है।

हिचकी को रोकने में फायदेमंद (Giloy Benefits to Stop Hiccup in Hindi)
गिलोय तथा सोंठ के चूर्ण को नसवार की तरह सूँघने से हिचकी बन्द होती है। गिलोय चूर्ण एवं सोंठ के चूर्ण की चटनी बना लें। इसमें दूध मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाती है।


5. कब्ज के इलाज में फायदेमंद (Giloy is Beneficial in Fighting with Constipation in Hindi)


गिलोय के औषधीय गुणों के कारण उसको 10-20 मिली रस के साथ गुड़ का सेवन करने से कब्ज में फायदा होता है। सोंठ, मोथा, अतीस तथा गिलोय को बराबर भाग में कर जल में खौला कर काढ़ा बनाएं। इस काढ़ा को 20-30 मिली की मात्रा में सुबह और शाम पीने से अपच एवं कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।

6. बवासीर के उपचार में फायदेमंद (Giloy Uses in Piles Treatment in Hindi)


हरड़, गिलोय तथा धनिया को बराबर भाग (20 ग्राम) लेकर आधा लीटर पानी में पका लें। जब एक चौथाई रह जाय तो खौलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा में गुड़ डालकर सुबह और शाम पीने से बवासीर की बीमारी ठीक होती है। काढ़ा बनाकर पीने पर ही गिलोय के फायदे पूरी तरह से मिल सकते हैं।

7.पीलिया रोग में में फायदेमंद (Giloy Benefits in Fighting with Jaundice in Hindi)


गिलोय के औषधीय गुण पीलिया से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं।
गिलोय के 20-30 मिली काढ़ा में दो  चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
गिलोय के 10-20 पत्तों को पीसकर एक गिलास छाछ में मिलाकर तथा छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया ठीक होता है।


8.लीवर विकार को ठीक करता है गिलोय (Giloy Helps in Liver Disorder in Hindi)


18
ग्राम ताजी गिलोय, दो  ग्राम अजमोद, दो  नग छोटी पीपल एवं दो  नग नीम को लेकर सेक लें। इन सबको मसलकर रात को 250 मिली जल के साथ मिट्टी के बरतन में रख दें। सुबह पीस, छानकर पिला दें। 15 से 30 दिन तक सेवन करने से लीवर पेट की समस्याएं तथा अपच की परेशानी ठीक होती है।

9.डायबिटीज में फायदेमंद (Uses of Giloy in Control Diabetes in Hindi)


गिलोय जिस तरह डायबिटीज कंट्रोल करने में फायदेमंद होता है लेकिन जिन्हें कम डायबिटीज की शिकायत हो, उन्हें गिलोय के नुकसान से सेहत पर असर भी पड़ सकता है।

गिलोय के 10-20 मिली रस में two चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से भी डायबिटीज में फायदा होता है।
एक ग्राम गिलोय सत् में तीन ग्राम शहद को मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से डायबिटीज में लाभ मिलता है।
10
मिली गिलोय के रस को पीने से डायबिटीज, वात विकार के कारण होने वाली बुखार तथा टायफायड में लाभ होता है।


10.मूत्र रोग (रुक-रुक कर पेशाब होना) में फायदेमंद (Giloy Cures Urinary Problems in Hindi)


गुडूची के 10-20 मिली रस में दो  ग्राम पाषाण भेद चूर्ण और 1 चम्मच शहद मिला लें। इसे दिन में तीन-चार बार सेवन करने से रुक-रुक कर पेशाब होने की बीमारी में लाभ होता है।

11.गठिया में फायदेमंद (Benefits of Giloy in Arthritis Treatment in Hindi)


गिलोय के 5-10 मिली रस अथवा 3-6 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम पेस्ट या फिर 20-30 मिली काढ़ा को रोज कुछ समय तक सेवन करने से गठिया में अत्यन्त लाभ होता है। सोंठ के साथ सेवन करने से भी जोड़ों का दर्द मिटता है।

12.फाइलेरिया (हाथीपाँव) में फायदेमंद (Giloy Uses in Cure Filaria in Hindi)


10-20
मिली गिलोय के रस में 30 मिली सरसों का तेल मिला लें। इसे रोज सुबह और शाम खाली पेट पीने से हाथीपाँव या फाइलेरिया रोग में लाभ होता है।

13. कुष्ठ (कोढ़ की बीमारी) में फायदेमंद (Giloy Benefits in Leprosy Treatment in Hindi)


10-20
मिली गिलोय के रस को दिन में दो-तीन बार कुछ महीनों तक नियमित पिलाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

14.बुखार उतारने में फायदेमंद (Giloy is Beneficial in Fighting with Fever in Hindi)


20
मिली गिलोय के रस में एक ग्राम पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, तिल्ली बढ़ना, खांसी, अरुचि आदि रोग ठीक होते हैं।
सुबह के समय 20-40 मिली गुडूची के चटनी में मिश्री मिलाकर पीने से पित्त विकार के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।
बराबर मात्रा में गुडूची, नीम तथा आँवला से बने 25-50 मिली काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार की गभीर स्थिति में लाभ होता है।

15.एसिडिटी में फायदेमंद (Giloy Cure Acidity in Hindi)


गिलोय के 10-20 मिली रस के साथ गुड़ और मिश्री के साथ सेवन करने से एसिडिटी में लाभ होता है।
गिलोय के 20-30 मिली काढ़ा अथवा चटनी में two चम्मच शहद मिलाकर पीने से एसिडिटी की समस्या ठीक होती है

16.कफ की बीमारी में फायदेमंद (Giloy is Beneficial in Cure Cough in Hindi)


गिलोय को मधु के साथ सेवन करने से कफ की परेशानी से आराम मिलता है।

17.स्वस्थ ह्रदय के लिए फायदेमंद (Giloy is Beneficial for Healthy Heart)


काली मिर्च को गुनगुने जल के साथ सेवन करने से सीने का दर्द ठीक होता है। ये प्रयोग कम से कम सात दिनों तक नियमित रूप से करना चाहिए।

18.कैंसर में फायदेमंद (Giloy is Beneficial in Cancer in Hindi)


आज के समय में कई आयुर्वेदाचर्यों ने अनेक ब्लड कैंसर के रोगियों पर गेहूँ के ज्वारे के साथ गिलोय का रस मिलाकर सेवन कराया गया। इससे बहुत लाभ हुआ। आज भी इसका प्रयोग किया जा रहा है और इससे रोगियों को अत्यन्त लाभ होता है।

19.चर्म रोग में फायदेमंद ( Giloy benefits for skin )

गुडुची त्वचा रोगों में निम्नलिखित लक्षणों में फायदेमंद है।

जलन की अनुभूति,खुजली,लालपन,सूजन,कोमलता, पित्ती,मुँहासे,दर्द और कोमलता के साथ फुंसी,यदि उपरोक्त लक्षण अधिक प्रमुख हैं, तो त्वचा रोगों के लिए टिनोस्पोरा एक अच्छा उपाय है।

20. एनीमिया में फायदेमंद (Giloy is Beneficial in Anemia in Hindi ) 

जिन लोगों को एनीमिया है, उन्हें गिलोय का सेवन (Giloy benefits) जरूर करना चाहिए। गिलोय के पत्तों से तैयार जूस पीने से शरीर में खून की कमी की समस्या दूर होती है। गिलोय के जूस (Giloy juice) के अलावा आप गिलोय के जूस में आधा चम्मच घी और एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इससे भी शरीर में खून की कमी दूर होती है।

गाउट और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ाएँ

गिलोय यूरिक एसिड और आयुर्वेद में गाउट के लिए पसंद की एक दवा है। गुडूची एएमए विषाक्त पदार्थों पर यूरिक एसिड गठन को कम करता है और शरीर में चयापचय गतिविधियों में सुधार करता है। यह गुर्दे के कार्यों को बढ़ाकर गुर्दे के कार्यों के माध्यम से यूरिक एसिड के उन्मूलन को भी बढ़ाता है।

यदि आपके हाथों-पैरों में झुनझुनी या बहुत ज्यादा जलन होती है, तो गिलोय का जूस पीना शुरू कर दें। हथेलियां गर्म रहती हैं, तो इसमें भी गिलोय बहुत फायदेमंद है। गिलोय की पत्तियों  को पीस लें। इस पेस्ट को तलवों और हथेलियों पर लगाकर आधा घंटा के लिए छोड़ दें। गिलोय की पत्तियों का काढ़ा पीना भी लाभप्रद होगा।

 

गिलोय के अन्य फायदे (Health Benefits of Giloy)


गिलोय का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा तरीके का सही ज्ञान होना ज़रूरी है। इसे बहुत तरह की बीमारियों में उपचारस्वरूप इस्तेमाल किया जाता है , इसको ज्वर की महान औषधि माना गया है और जीवन्तिका नाम दिया गया है

गिलोय प्रकृति में एंटी-पायरेटिक है, जिसका अर्थ है कि यह पुराने बुखार को कम कर सकता है जो स्वाइन फ्लू, डेंगू, या मलेरिया जैसी कई खतरनाक स्थितियों के साथ आता है।  गिलोय का रस श्वसन समस्याओं जैसे खांसी, सर्दी, या टॉन्सिलिटिस के साथ मदद करता है।

 एक अत्यधिक प्रभावी रक्त शोधक के रूप में भी जाना जाता है। इसका उपयोग हृदय संबंधी दुर्बलता, गठिया, एनीमिया, कुष्ठ रोग, पीलिया और साथ ही कैंसर जैसी अन्य गंभीर बीमारियों जैसे कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। गिलोय स्वाइन फ्लू को ठीक करने की अपनी क्षमता के कारण बेहद लोकप्रिय है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में गिलोय के फायदे Benefits of Giloy in Boosts immunity


प्रतिरक्षा को बढ़ावा देना गिलोय का पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाभ है। यह शरीर का कायाकल्प भी कर सकता है। गिलोय में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और खतरनाक बीमारियों से लड़ते हैं। यह मुक्त कणों को बाहर निकालता है और स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए यकृत और गुर्दे दोनों से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। इन सब के अलावा गिलोय ऐसे बैक्टीरिया से भी लड़ती है जो हमारे शरीर में बीमारियों का कारण बनते हैं। यह यकृत रोगों और मूत्र पथ के संक्रमण का मुकाबला करता है।

यह आयुर्वेदिक जड़ी बूटी एंटीऑक्सिडेंट का एक पावरहाउस है जो मुक्त कणों को बेअसर करता है और सूजन को रोकता है। इसके अलावा, यह रक्त को शुद्ध करता है, प्रतिरक्षा को बढ़ाता है, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और बैक्टीरिया और वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से लड़ता है। दुनिया भर में कई नैदानिक ​​परीक्षण हो रहे हैं और विभिन्न दवाएं और जड़ी-बूटियां कोरोना ( COVID-19) वायरस के संभावित उपचार के रूप में सामने आई हैं। उनमें से दो गिलोय और अश्वगंधा प्रमुख हैं।

गिलोय के रस का सेवन आपको बुखार से छुटकारा पाने में मदद कर सकता है, जो COVID-19 के लक्षणों में से एक है। इसके विरोधी भड़काऊ गुण सांस की समस्याओं जैसे खांसी, ठंड और सांस लेने की समस्याओं से निपटने में मदद करते हैं। ये कोरोनावायरस संक्रमण के प्रमुख संकेत भी हैं। गिलोय की गोलियों या जूस को खाली पेट सुबह लेना सबसे अधिक लाभकारी है। इसे रोजाना लेने से जलन की समस्या से निजात मिलती है, प्लेटलेट्स का काउंट बढ़ता है, डायबिटीज नियंत्रित होती है और इम्युनिटी बढ़ती है।


गिलोय के नुकसान (Side Effects of Giloy)


गिलोय के लाभ की तरह गिलोय के नुकसान (Giloy side effects in Hindi) भी हो सकते हैं :-
गिलोय के सेवन के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं क्योंकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है। हालांकि, कुछ मामलों में - गिलोय के उपयोग से कब्ज और रक्त शर्करा का स्तर कम हो सकता है।

इसलिए यदि आप मधुमेह के रोगी हैं और लंबे समय से गिलोय का सेवन कर रहे हैं, तो अपने रक्त शर्करा के स्तर की नियमित रूप से निगरानी करें।
यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं , तो भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए

कुछ मामलों में, गिलोय का उपयोग कब्ज पैदा कर सकता है। चाहे आप इसे जूस के रूप में लें या पूरक कैप्सूल के रूप में, यह गिलोय के गंभीर दुष्प्रभावों में से एक है जिसे आपको ध्यान में रखना चाहिए।

जो लोग पहले से ही निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) के मरीज हैं उन्हें गिलोय के सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि गिलोय भी ब्लड प्रेशर को कम करती है। इससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है।

किसी भी तरह की सर्जरी से पहले भी गिलोय (Giloy in hindi) का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को कम करती है जिससे सर्जरी के दौरान मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गिलोय के सेवन से शरीर की इम्युनिटी पॉवर मजबूत तो होती है लेकिन कई बार इम्युनिटी के अधिक सक्रिय होने की वजह से ऑटो इम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए ऑटो इम्यून बीमारियों जैसे कि मल्टीप्ल स्केरेलोसिस या रुमेटाइड आर्थराइटिस आदि से पीड़ित मरीजों को गिलोय से परहेज की सलाह दी जाती है।

आप हर सुबह गिलोय और आंवला का रस पी सकते हैं लेकिन रात को लेने से बचें। बेहतर परिणाम के लिए इसे सुबह खाली पेट ही पिएं।

गिलोय की पत्तियों, एलोवेरा, पपीते के पत्तों और अनार से बने रस से केवल प्लेटलेट काउंट बढ़ता है, बल्कि शरीर की संपूर्ण प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।  गिलोय सत्व चूर्ण एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक निर्माणऔषधि  है जो दिव्य गिलोय के पौधे के जलीय अर्क के स्राव से प्राप्त होता है। आमतौर पर गुडुची सत्व के रूप में कहा जाता है, यह जादुई पाउडर अपच, कब्ज, हाथ और पैर की जलन, बुखार जैसे सभी प्रकार के पित्त को बढ़ाने वाले विकारों को दूर करने की दिशा में स्वास्थ्य लाभ देता है।

दोस्तों , गिलोय / गुडुची  / अमृतवल्ली / अमृत समान औषधि के अनेकों फायदों में से कुछ आपको बताये  हैं , कृपया इनको पढ़कर आप भी स्वास्थ्यलाभ  लीजिये और अपने मित्रों को भी इस दिव्य औषधि के बारे में जानकारी शेयर कीजिये  किसी भी सवाल के जबाब के लिए  कृपया  कमेंट कीजिये 

आपका  मित्र  :  राघवेंद्र

 

 

 

 

 

 


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