सूर्य चिकित्सा क्या है ,सूर्य चिकित्सा विज्ञान, कैल्शियम की कमी हो तो करें सूर्य स्नान, स्वास्थ्य के लिए हितकारी है सूर्य स्नान, जाने इसे करने के नियम Health benefits of sun bath therapy,Sun bathing precautions, benefits and how to be safe... with sun bath

सूर्य चिकित्सा क्या है,सूर्य चिकित्सा विज्ञान, कैल्शियम की कमी हो तो करें सूर्य स्नान ,  स्वास्थ्य के लिए हितकारी है सूर्य स्नान ,जाने इसे करने के नियम   
Health benefits of sun bath therapy , Sun bathing precautions, benefits and how to be safe... with sun bath
                                                    


     सूर्य स्नान (Sun bath  ) का आनंद , भगवान भास्कर ही प्रकृति के कण-कण में सुषमा और सौंदर्य बिखेरते  हैं वनस्पति का सौंदर्य उन्हीं की देन है , प्राणी जगत में जो आनंद दिख रहा है ,उसका उदगम वहीं से हैसूर्य किरणों के प्रकाश में ही सब जीते हैं विकसित ,पल्लवित और पुष्पित होते हैंअनंत जीवनदाई शक्ति भरी है, भगवान अंशुमाली की रश्मियों में।

          खुले मैदान में खेलने  किलकने वाले पशु-पक्षियों को देखिए ,चाहे स्त्री- पुरुषों, बालकों- बालिकाओं को देखिए ,उनके कूदने- फांदनेने में उनके हंसने- खिलखिलाने में उसी जादूगर का जादू भरा है। और उसका अभाव ?

    आइए एक पुरानी घटना है, नवविवाहित दंपति , किराए का कमरा और छोटी सी जगह खिड़की भी ऐसी थी कि जहां आधा घंटे भी धूप ना आती। पति कहता ही रह गया और पत्नी के चलते तुलसी का बिरवा कुंभलाकर ही रह गया।पति कहता था कि गमला धूप में रखा जाए पत्नी की जिद थी कि गमला खिड़की पर रखा जाए ताकि तुलसी के बिरवा से छन छन कर पवित्र हवा आए लेकिन हवा तो तब आती जब बिरवा पनपता किंतु बिना धूप केवल पनपता कैसे? आखिर तुलसी का बिरवा नहीं पनप सका।

     सवाल है कि पेड़ पौधों में यह हरीतिमा क्लोरोफिल ( CHLOROFIL ) आती कहां से है? यह हरी-हरी घास यह हरे-भरे पौधे यह हरे-हरे वृक्ष यह सुंदर-सुंदर चहचहाते  रंग-बिरंगे फूल यह हरियाली यह सौंदर्य यह यह शोभा पाते कहां से हैं ? वृक्ष और लताएं ,फल और फूल खेतों में खड़े लहलहाते  पौधे कहां से पाते हैं अपनी जीवनी शक्ति ? वनस्पति में , प्राणी- जगत में यह सुषमा यह प्राणशक्ति कहां से आती है ? यह खुशनुमा बगीचा खिलता कैसे है? सब का उत्तर है यह है सूर्य भगवान की कृपा।

अंग्रेजी में एक कहावत चल पड़ी है --- “where the sun does not enter doctor must”  अर्थात "जहां सूर्य को प्रवेश नहीं मिलेगा वहां डॉक्टर को प्रवेश मिलेगा"।

और गरीब भारत के स्त्री-पुरुष तो बेचारे रोटी नहीं जुटा पाते सुबह शाम उनके लिए डॉक्टर का सवाल ही कहां आता है? वे तो सहज ही मौत के घाट उतर जाते हैं तो फिर सूर्य प्रकाश का सेवन क्यों ना करें?

                                                 

सूर्य किरणों के बारे में विज्ञान क्या कहता है -- हर चीज को तर्क की और प्रयोग की कसौटी पर कसने वाला विज्ञान क्या कहता है ? उसे थोड़ा समझें। वह कहता है कि हम यह तो नहीं बता सकते कि ऐसा क्यों होता है पर हमारे प्रयोग इस बात के सबूत हैं कि सूर्य किरणों में रोगों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता है। भयंकर से भयंकर रोग भी सूर्य किरणों की सहायता से अच्छे हो जाते हैं फिर जान लेने वाला यह क्षय (Tuberculosis) जैसा रोग ही भले क्यों ना हो ! सूर्य किरणों में रोग नाशक विशिष्ट क्षमता है।

 सूर्य को यूनानी भाषा में हेलियों कहते हैं--प्रसन्नतादाता ,आनंददाता। उन की किरणों से चलने वाली चिकित्सा--हेलियोथैरेपी आज विश्व भर में छा गई है। उससे ना जाने कितने रोगी स्वस्थ हो रहे हैं।

19वीं शताब्दी के मध्य से लोगों का ध्यान इस ओर गया है बोनेट ( 1845 ), अर्नाल्ड रिक्ली (1848 ), पाम ( 1890 ), फिनसेन ( 1893 ),  ब्रेबीट आदि ने सूर्य किरणों से रोग नाश के अनेक प्रयोग किए। 1930 से स्विट्जरलैंड में सोलेरियम सूर्यग्रह खोलकर डॉक्टर रोलियर ने क्षयरोगियों को अच्छा करके विश्व को चमत्कृत कर दिया।

       कहानी इस प्रकार है की रोलियर यूरोप के प्रसिद्ध डॉक्टर कोचर के मातहत  क्षय रोगियों की चिकित्सा करते थे।  रोगी की हड्डियों को रगड़- रगड़ कर ऑपरेशन द्वारा उसे रोग मुक्त करने की पद्धति थी। इससे कुछ दिन तक तो रोगी ठीक हो जाता था किंतु बाद में फिर रोग पनप उठता था। रोगियों के दो -तीन -चार- पांच ऑपरेशन  से लेकर  बीस- बीस  तक ऑपरेशन होते , पर फिर भी उसे मौत के घाट उतरना पड़ता।

रोगियों की भयंकर पीड़ा और वेदना देख कर रोलियर व्यथित हो पड़े ,सोचने लगे।

सोचते-सोचते उनकी समझ में आया कि इस रोग के कारणों में मूल कारण है--- सूर्य प्रकाश का अभाव । मनुष्य अपने शरीर पर दुनिया भर के कपड़े लादकर सूर्य प्रकाश से वंचित होता है और उसी से यह रोग पनपता है। उसे धूप क्यों ना मिले , खुली धूप मिले तो वह स्थाई रूप से रोग मुक्त हो सकता है।

अपने चिंतन को व्यवहार में परिणित करने के लिए रोलियर ने स्विट्जरलैंड में समुद्र तल से 6,000 फीट की ऊंचाई पर बसे लेसिन नामक गांव में अपना सोलेरियम- सूर्य ग्रह खोला। खुली धूप , खुली हवा ने अपना जादू बिखेरना शुरू कर दिया , क्षय रोगी पूर्ण रूप से स्वस्थ होने लगे अन्य रोगों के रोगियों पर भी सूर्य के प्रकाश का अद्भुत प्रभाव पड़ने लगा।

सूर्य -प्रकाश लीग का अध्यक्ष डॉक्टर सी.डब्ल्यू .सेलीबी सन लाइट एंड हेल्थ (सूर्य प्रकाश और स्वास्थ्य ) नामक पुस्तक में लिखता है कि सन 1921 में जब मैं डॉक्टर रोलियर के इस चिकित्सालय में गया था तो कुछ भारतीय डॉक्टर लोग रोलियर से पूछ रहे थे कि इधर तो धूप की कमी रहती है पर भारत में तो धूप -ही -धूप है वहां हम धूप का सदुपयोग कैसे करें?

बीसवीं शताब्दी में जामनगर के राजा साहब जब यूरोप से सोलेरियम देख कर आए तो उन्होंने भारत आकर प्रचुर धन लगाकर सूर्यगृह खोला। आज देश-विदेश में अनेक सूर्यगृह खुले हैं, जो पाचन तंत्र ,चमड़ी ( SKIN ) मज्जा तंतु के रोगों से लेकर क्षय रोग (Tuberculosis ) जैसे भयंकर रोगों की सफल चिकित्सा करने में सफल हो रहे हैं।

                                          

सूर्य किरणों में जो सतरंगीपन है-- नीला, आसमानी ,हरा ,पीला, नारंगी ,बैगनी और लाल रंग -- उन रंगों को खींचकर उनके शीशों से, उनके पानी से, उनके तेल से चिकित्सा की परिपाटी आज बहुश: प्रचलित  है। एक्सरे तो आज हमारे दैनिक जीवन की आवश्यकता का प्रमुख अंग ही बन बैठा है। वेदों में सूर्य की किरणों का ऐतश और नीलग्रीव कहकर वर्णन मिलता है इनसे रक्तक्षय, रिकेट ,स्कर्वी ,ओस्टियोमेलेशिया ,क्षय रोग Tuberculosis ) आदि के अच्छे होने की बात कही गई है।

इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ॰ अजय सहगल का कहना है कि आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है जिससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारम्भ हो जाती है और बीमारी में लाभ होता है। वास्तव में सूर्य किरणों में रोग निवारक और स्वास्थ्यवर्धक अनुपम शक्ति भरी पड़ी है। 

   अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है।जो व्यक्ति सूर्योदय के समय सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन करता है उसे हृदय रोग कभी नहीं होता। विटामिन डी के अभाव में महिलाएं मुरझा जाती हैं और बच्चे सूखा रोग के शिकार बन जाते हैं। पर सूर्य तो ठहरा विटामिनों का भंडार। लगाइए शरीर पर सरसों का तेल और थोड़ी देर सूर्य स्नान कर लीजिए ,आपको विटामिन-D ही D मिल जाएगा । सूर्य के सामने अपना शरीर खुला करो, तुम्हारे सारे रोग भाग जाएंगे। लेकिन हम अपनी आदत और शिक्षा से लाचार हैं। हमें लंगोटी पर शर्म आती है, असभ्यता का लक्षण माना जाता है।

भारतीय वेद में प्रार्थना की गई है कि 'हे ईश्वर हमें सूर्य दर्शन से दूर ना रख' । 

    वेद और विज्ञान दोनों कहते हैं कि खुले शरीर से रहो कपड़े की जिल्द में कल्याण नहीं। शरीर पर पड़कर धूप तुम्हें चमका देगी। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सूर्य शक्ति प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का सन्देश मानव जाति को दिया था, उन्होंने इसे करने के नियम सूर्य नमस्कार,सूर्य मंत्र करने के नियम  जाने 

सूर्य स्नान (Sun bath ) क्या है ?

सूर्यस्नान को धूपस्नान (Sun bath ) भी कहते हैं। आज के समय में  भारत में तो कम पर विदेशों में यह सनबाथ  बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। थोड़ी देर सुबह की धूप में बैठने से आपको कई सेहत लाभ भी होते हैं। तो हम यदि अपना कल्याण चाहते हैं रोग मुक्त होकर स्वस्थ और प्रसन्न जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो उसका एक ही उपाय है और वह है सूर्य स्नान। सूर्य स्नान का आनंद लीजिए। आपके स्वास्थ्य और आनंद का पूर्ण बीमा तैयार है।

सूर्य स्नान क्या होता है और इसकी क्या विधि है ...(Sun bathing precautions, benefits and how to be safe...)

आइए देखते हैं सूर्य स्नान के लाभ और विधि , अब बात आती है सूर्यस्नान का उपाय अथवा कैसे करें सूर्यस्नान?  ( Health benefits of sun bath therapy )

उपाय बहुत सीधा-साधा है , सूर्य स्नान की विधि ,जाने इसे करने के नियम, सिर्फ इन 10 कामों में स्वयं को ढालना है:--

1. मकान का या छत का कोई खुला एकांत स्थान खोज लीजिए जहां सूर्यकिरणें मिलती हो।

2. शरीर पर के तमाम कपड़े उतार कर तौलिया (TOWEL) या गमछा पहन ले।

3.प्रातः काल सूर्योदय के समय से सूर्यस्नान आरंभ करें । सायंकाल सूर्यास्त के समय सूर्यस्नान कर सकते हैं। प्रखर धूप में सूर्यस्नान ना करें।

4. सिर को भीगे रूमाल या तौलिया से ढक लें, केले के पत्ते मिल जाए तो और भी अच्छा होगा।

5. आपके पूरे खुले बदन पर धूप लगने दें।

6. प्रारंभ में 15 मिनट से सूर्यस्नान का आरंभ करें धीरे-धीरे अवधि बढ़ाकर 2 घंटे तक ले जा    सकते हैं।

7.सूर्यस्नान के समय को चार भागों में बांटकर सीधे , चित्त , दाएं और बाएं करवट से धूप लें।

8. सूर्यस्नान के बाद ठंडे जल से तौलिया भिगोकर शरीर को रगड़- रगड़ कर स्वच्छ कर लें।

9. भोजन से एक घंटा पहले और भोजन के 2 घंटे बाद तक सूर्यस्नान ना करें।

10. विटामिन डी अधिक मात्रा चाहिए हो तो शरीर पर सरसों का तेल लगाकर सूर्यस्नान करें।

इस प्रकार से निरोग रहेंगे, कीजिए 15 मिनट सूर्यस्नान...

इससे दिन प्रतिदिन आपका स्वास्थ्य सुधारने लगेगा। तन- मन प्रसन्न होगा।

                                               


हां मित्रों, एक बात ध्यान रखिएगा इस सूर्य स्नान के लिए सूर्य देव को कृतज्ञता पूर्वक धन्यवाद अवश्य दीजिएगा, क्योंकि उनके द्वारा इस पूरे संसार को जो अक्षय ऊर्जा दी जा रही है उससे ना हम सिर्फ स्वस्थ रह सकते हैं बल्कि आगे टेक्नोलॉजी की सहायता  से इस सौरऊर्जा  को संचय करके विश्व में बहुत बड़ी-बड़ी योजनाएं बन रही हैं जो हमारे लिए वरदान साबित होंगी  इससे हम पृथ्वी पर जीवन को बढ़ाएंगे और हमें हमारी आयु के साथ पृथ्वी की आयु भी दिन प्रतिदिन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सौर ऊर्जा वह उर्जा है जो सीधे सूर्य से प्राप्त की जाती है। सौर ऊर्जा ही मौसम एवं जलवायु का परिवर्तन करती है। यहीं धरती पर सभी प्रकार के जीवन (पेड़-पौधे और जीव-जन्तु) का सहारा है।

सौर ऊर्जा के लाभ सौर ऊर्जा के बारे में रोचक तथ्य भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य

सौर ऊर्जा से उज्जवल होता भारत का भविष्य , यह एक पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा का स्रोत्र हैं। सौर ऊर्जा उत्पन्न करने से जीवाश्म ईंधन की तरह में बड़ी मात्रा में प्रदूषक (जैसे CO 2) जारी नहीं होते है ...

सूर्य एक दिव्य शक्ति स्रोत, शान्त पर्यावरण सुहृद प्रकृति के कारण नवीकरणीय सौर ऊर्जा को लोगों ने अपनी संस्कृति जीवन यापन के तरीके के समरूप पाया है। विज्ञान संस्कृति के एकीकरण तथा संस्कृति प्रौद्योगिकी के उपस्करों के प्रयोग द्वारा, सौर ऊर्जा का उपयोग  ,सौर ऊर्जा भविष्य के लिए अक्षय ऊर्जा का स्रोत साबित होने वाली है।

लूटिये  यह आनंद ! निशुल्क ! निर्बाध ! एकदम मुफ्त !!

 

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आपका शुभेच्छु : राघवेंद्र

 

 



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3 टिप्पणियाँ

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27 जुलाई 2020 को 11:10 pm ×

बहुत ही सारगर्भित जानकारी धन्यवाद

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