मानवता की सेवा : जीवन का एकमात्र उदेश्य Service to humanity : The only purpose of life

 


मानवता की सेवा : जीवन का एकमात्र उद्देश्य 

Service to humanity: The only purpose of life

     हमें जीवन में अपने अंदर की कमियों और बुराइयों को निकालकर एक अच्छा इंसान बनना और अपने कार्यों से दूसरों को ख़ुशी देना ही मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए जीवन में चाहे जितनी भी समस्याएं क्यों जाएँ, लेकिन हमें उनका समाधान करने और जीवन को बेहतर बनाने के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिएहमें सदैव यह याद रखना चाहिए कि कोई भी समस्या स्थायी नहीं होती और यह भी समझना चाहिए कि कोई भी दोस्त या सम्बन्धी चिरकाल तक साथ नहीं दे सकता हमें स्वयं पर और भगवान् पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए एक व्यवहारिक दर्शन के अनुसार जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं को खुश रखना नहीं है वरन इसका उपयोगी होना है, सम्मानजनक होना है, दयालु होना है। मानवता की सेवा कोई क्रिया मात्र नहीं है स्वयं बुराई-रहित होकर, भलाई का फल माँगना, ही कुछ चाहना, यही संसार की सबसे बड़ी सेवा है


सेवा का सही अर्थ क्या है ? ( True meaning of Service )

सेवा का अर्थ है - मन, वाणी, कर्म से बुराई - रहित होना तथा यथाशक्ति परिस्थिति के अनुसार भलाई करना

सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:

सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्- दु:खभाग्भवेत्।।


 अर्थात समस्त जगत के सभी प्राणी सुखी हो,किसी को भी कोई कष्ट ना हो, 
सभी स्वस्थ रहें, सभी का मंगल हो, सबका कल्याण हो और कोई भी दुख का भागी ना बने। ऐसे प्रेरणादायक विचार हमारे जीवन को बहुत ही सुंदर और शुभ बना देते हैं। यदि हम अपने मन में सुंदर भाव रखते हैं और अपनी अंतरात्मा से अपनी पूरी शक्ति और काबिलियत के अनुसार इन पर कार्य करने के लिए तत्पर हो जाते हैं तो इस अद्भुत मानव जीवन का उद्देश्य पूरी तरह से पा सकते हैं जिसमें की दूसरों का कल्याण करना एक प्रमुख कार्य है।

' मदर टेरेसा ने कहा था कि मैं भगवान के हाथ में एक छोटी-सी पैंसिल हूं। भगवान के पास  अनगिनत पैंसिलें हैं। वे एक पैंसिल को तब तक इस्तेमाल करते हैं जब तक वह चलती है। उसके  बाद वह दूसरी पैंसिल उठा लेते हैं, फिर उसके खत्म होने पर अगली। हम ऐसी पैंसिलें हैं जिनसे   भगवान मानव सेवा का इतिहास लिखते हैं।'

संत कबीर के अनुसार मानव जीवन को चिड़िया का रेनबसेरा  और  दो दिन का मेला कहा गया है

 माटी चुन चुन महल बनाया लोग कहे घर मेरा

ना घर तेरा ना घर मेरा चिड़िया रैन बसेरा।।

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी, जोड़ भरेला थैला। 

कहां तक कबीर सुनो भाई साधु संग चले ना थैला।

उड़ जायेगा हंस अकेला जग दो दिन का मेला।।

जगत में मानव के रूप में हमको ऐसी अद्भुत क्षमताएं  प्राप्त है कि हम सेवा, दान, परोपकार आदि के द्वारा अपने जीवन के अभीस्ट लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यदि जीवन में हम सर्वे भवंतु सुखिन: अर्थात सभी सुखी होंगे तो हम भी सुखी हो जाएंगे इस तरह का भाव रखके अपने कार्यों को करते हैं तो यह परमार्थ होता है और केवल अपने लिए अपने सुख के लिए प्रयत्न करना एक प्रकार का स्वार्थ है। मैं मानता हूं कि सब को सुखी करना हमारे हाथ की बात नहीं है परंतु फिर भी यह पवित्र भाव अपने जीवन का उद्देश्य बन जाए तो हम जो भी करेंगे वह सब एक सेवा होगी।

“We don't give to get, we get to give”  R. Alan Woods

दूसरों को देने की भावना होगी तो उससे हम अपने जीवन में सफल होते चले जाते हैं।

 

जीवन का उद्देश्य क्या है ?  (What is the Purpose of Life)


जीवन में हर एक को सुख और शांति चाहिए लेकिन हम दूसरों को दुख देकर यह नहीं पा सकते। यदि हम दुख देंगे तो दुख मिलेगा सुख देंगे तो सुख निश्चित रूप से मिलेगा। जिस प्रकार से हम दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखते हैं उसी प्रकार से इस जीवन में भी जो हम देते हैं वही हमें प्राप्त होता है या लौटकर मिलता है।
वास्तव में यह सेवा की कड़ियां हमारे जन्म के पूर्व से प्रारंभ हो जाती हैं जब हम मां के गर्भ में रहते हैं तो मां को गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए सावधानी रखनी पड़ती है, अपने खान-पान में परहेज रखना पड़ता है और उसके साथ ही गर्भस्थ शिशु को अच्छे संस्कार देने के लिए अपने  जीवन के तौर-तरीके भी अच्छे रखने पड़ते हैं। अच्छी पुस्तकें पढ़ना, अच्छी मूवी देखना, अच्छी प्रकार की सुंदर कल्पनाएं करना आदि गर्भस्थ शिशु की माता की जीवन शैली रहती है।
उसके बाद जब बच्चे का जन्म हो जाता है तो उसके पालन-पोषण के लिए भी माता को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। बच्चे के बड़े होने पर माता-पिता को उसकी शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था करनी पड़ती है।  हम स्कूल -कॉलेज जाकर सीखना शुरू करते हैं तो यह सब सेवा का अंग ही है।

जब हम अपनी शिक्षा- दीक्षा को पूरी करके जीवन यापन करना शुरू कर देते हैं तो हमारे जीवन में यही सेवा कर्तव्य रूप में जाती है और आवश्यक रूप से हम इसका अंग बन जाते हैं ये सब हमें स्वाभाविक प्रतीत होता है किंतु कहीं ना कहीं हमे जो मिला है, वही हम समाज को, परिवार को और देश को लौटाने  का प्रयास करते हैं।
यदि हम प्रकृति की बात करें तो सूरज से हमें रोशनी और ऊष्मा के रूप में ऊर्जा, चंद्रमा से शीतलता और स्वच्छ चांदनी का प्रकाश, नदियों से मीठा जल, पेड़- पौधों और वनस्पतियों से विभिन्न प्रकार के मधुर फल और छाया, भूमि के द्वारा अन्न तथा औषधियां, हवा से हमारे जीवन में गति, बादलों से बिना किसी भेदभाव के वर्षा रूपी जल, पशु योनि में गौ माता आदि के द्वारा दूध- दही- घी आदि हमारे जीवनयापन के लिए हमको बिना किसी श्रम के प्राप्त हो पा रहे हैं।

 

हम मानवता की सेवा हेतु क्या करना चाहिए ?

( What to do for humanity )

 

समाज के कई वर्गों में  लोग आज परेशान हैं, पीड़ित हैं।  जिन लोगों के पास खाने को भोजन नहीं है, रहने को मकान नहीं है, पहनने को कपड़े नहीं है। हमें उन जैसे लोगों की मदद करनी चाहिए। हम सब मिलकर , सभी की मदद कर और समाज में प्रेम का संदेश देकर, सभी की खुशहाली के लिए काम कर सकते हैं

असहाय, दीन- दुखी लोगों की मदद करके हमें अपने अनमोल जीवन का पूरा उपयोग करना चाहिए।

मांसाहार छोड़कर शाकाहारी बनकर भी हम पशु पक्षियों के प्रति मानवता दिखा सकते हैं , हमें मांसाहार छोड़कर शाकाहार की ओर बढ़ना चाहिए।

कई बार जब किसी व्यक्ति के साथ कोई कुछ गलत काम कर देते हैं तो वह बदला लेने का प्रयास करता है,  ऐसे में हमें लोगों को क्षमा कर देना चाहिए। मन में किसी भी तरह की शिकायत शिकवा नहीं रखनी चाहिए। दूसरों को माफ करने से हम और महान बन जाते हैं। 

हमें ईश्वर ने जो दिया है ,उसके लिए कभी भी अपनी स्थिति के लिए हमें शिकायत नहीं करनी चाहिए। हमें कृतज्ञतापूर्वक ईश्वर का धन्यवाद देना चाहिए। अपने मन में संतोष रखना चाहिए। इस तरह हम मानवता दिखा सकते है कई बार हमारे पास रुपए, पैसे, गाड़ी, बंगला जैसी सारी चीजें होती है। उसके बावजूद भी हम ईश्वर को कोसते रहते हैं।

जीवन का एकमात्र उदेश्य मानवता की सेवा करना है लियो टॉल्स्टॉय

आज दुनिया में महान बनने की चाहत तो हर एक में हैं, पर पहले हमें इंसान बनना चाहिए, जो अक्सर हम भूल जाते हैं

 

 

मानवता की सेवा परम सेवा है
(To serve humanity is to serve God)


मानव जीवन को सफल करने के लिए हम अपनी क्षमताओं प्रयोग कर सकते हैं और निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। मानव के रूप में हमारे अंदर चार प्रकार की क्षमताएं है, जिनके द्वारा हम लोगों की सेवा करके उनको सुख पहुंचाने की प्रयास कर सकते हैं

  • तन के द्वारा सेवा
  • मन के द्वारा सेवा
  • धन के द्वारा सेवा 
  • वाणी के द्वारा सेवा

  • तन के द्वारा हम इस शरीर से अपने माता पिता और वृद्धजनों की सेवा कर सकते हैं। उनकी थकान को मिटा कर, उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी बीमार व्यक्ति को अपनी और से सेवा-सुश्रुषा प्रदान कर, प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाकर, भूखे को भोजन करा कर, रक्तदान कर, अपंग, निर्धन और विधवाओं की मदद करके, बेरोजगार को रोजगार दिलवाकर आदि कई माध्यमों से हम अपने शारीरिक सेवाओं को कर सकते हैं । यदि हमारे प्रयासों से किसी आदमी का जीवन सफल हो जाता है तो यह भी परम सेवा है।

  • मन से सेवा , इसको मानसिक सेवा भी कहते हैं, जिसके द्वारा हम सभी विश्व के लोगों हेतु उनके कल्याण के लिए सच्चे मन से, ह्रदय से प्रार्थना करें। सभी के प्रति सद्भावना रखें। जिसमें सभी का हित हो ऐसे विचार सदैव अपने चिंतन में रखें। अपने व्यवहार से दूसरों के मन को सदैव प्रसन्न रखें। अपने ह्रदय से हमेशा दुखी प्राणियों के कष्ट निवारण हेतु प्रार्थना करें। स्वयं के लिए किसी प्रकार की कामना नहीं करें। हमारी इस सेवा के द्वारा निश्चित रूप से सभी लोग लाभ उठाएंगे और प्रसन्नता का अनुभव कर सकते हैं ।

  • धन से सेवा जब हमारे पास दूसरों की सेवा के लिए मन बन जाता है तो हम अपने पास उपलब्ध धन से यथासंभव किसी एनजीओ के साथ जुड़कर या स्वयं  समाज में कुछ जरूरतमंद लोगों को देखकर उनकी छोटी-छोटी आर्थिक मदद कर सकते हैं। धीरे-धीरे बड़े रूप में अन्न दान, जल दान, भूमि दान, विद्यादान आदि, विद्यालय, अनाथालय, चिकित्सालय, गौशाला, पुस्तकालय आदि बनवाकर हम धन से सेवा कर सकते हैं। हम निर्धन छात्रों की छात्रवृत्ति द्वारा एवं पुस्तकों से आर्थिक मदद कर सकते हैं।  अस्पतालों में जो अभावग्रस्त रोगी हैं उनकी सेवा हम दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाकर कर सकते हैं। 

  • वाणी की सेवा वह सेवा होती है किसके द्वारा हम सदैव सभी को प्रिय लगने वाले मधुर और सच्चे बोल बोले, सच्ची बात करें। किसी को भी अपने वाणी से कष्ट पहुंच पाए ,ऐसा प्रयास हमें सदैव करना चाहिए।

ऐसा कहा भी गया है :-
ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय।

औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय।।


आज आर्थिक युग में भी बिना किसी छोटे या बड़े स्वार्थ सिद्धि के उद्देश्य से सेवा हमको करना चाहिए किसी से कुछ पाने की कामना से भी सेवा हमको नहीं करना चाहिए । इसका कोई महत्व नहीं रहता जैसे -- बहुत सारे लोग अधिकारियों की , मंत्रियों की सेवा करते हैं तो उसमें कुछ ना कुछ उनके उद्देश्य जुड़े होते हैं।

हमेशा ध्यान रखिए कि हमें सदैव लोगों को देने की भावना रखना चाहिए । जब हम अपने मन में किसी भी प्रकार का अभिमान , स्वार्थ और आसक्ति के बिना कोई छोटी या बड़ी  सेवा समाज को देते हैं तो वह भी एक महान सेवा बन जाती है।
हमें  व्यभिचारी, चोरी करने वाले घूस लेने वाले और किसी भी प्रकार के गलत कार्यों में लगे लोगों की सेवा नहीं करनी चाहिए।
इस तरह से हम देखें तो हमको अपने निर्मल हृदय से लोगों को देने की भावना धैर्य और निष्ठा के साथ सदैव रखना चाहिए। इस प्रकार से हम लोगों की शांति , आनंद और खुशियां का स्त्रोत बन जाते हैं।जिससे कि हमारे हृदय में सदैव शांति , मुख पर प्रसन्नता ,व्यवहार में नम्रता आदि स्वाभाविक तौर पर जाते हैं।

 

आप किसी व्यक्ति के काम आए और हमेशा आपकी वजह से कोई ना कोई व्यक्ति खुश रहे , आप अपने स्वाभाव और कर्म के द्वारा दूसरों के चेहरे पर यदि खुशियां लाते हैं तो यही जीवन  का सही उद्देश्य है सदैव दूसरों के लिए जिए जाने वाला जीवन ही धन्य है


मानव को मानव से जोड़ें , संकीर्णता को हम छोड़ें

चलो बनायें वो गुलदस्ता कि, नफरत की दीवारें तोड़ें


प्रेम भाव से सबको देखें , हर कोई आँख का तारा हो

प्रेम में डूबा, प्रेम से महका ,अपना जीवन सारा हो ।।


मानवता कि सेवा : जीवन का एक मात्र उद्देश्य , विषय पर मैंने अपने विचार प्रस्तुत किये हैं कृपया आप भी अपनी प्रतिक्रिया  कमेंट बॉक्स में दीजिये 

आपका दोस्त  : राघवेंद्र

 

 

 

 

 

 

 

 


Previous
Next Post »